vinod1-312x246
ओशो ने एक कलाकार को नहीं बनने दिया सुपरस्‍टार, पत्‍नी ने भी कर दिया था बहिष्‍कार!
नई दिल्ली. विवादास्पद आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक ओशो ने न सिर्फ लोगों की जिंदगियां बदलकर रख दीं बल्कि उसने बॉलीवुड में भी एक मशहूर कलाकार को सुपर स्टार बनने से रोक दिया। चौंकिए नहीं, बल्कि यह सच है। ओशो ने नामचीन बॉलीवुड स्टार विनोद खन्ना की सिर्फ जिंदगी ही नहीं बदली बल्कि शायद उनसे सुपर स्टार का तमगा भी छीन लिया।

ऐसा मानने वालों की कमी नहीं है कि अगर विनोद खन्ना आचार्य रजनीश के चक्कर में न पड़ते तो शायद बॉलीवुड का इतिहास कुछ और होता। शायद अमिताभ बच्चन इतनी आसानी से सुपर स्टार नहीं बनते और विनोद खन्ना का करियर उनके आसपास ही होता। ओशो का जादू विनोद खन्ना के सिर चढ़कर बोला लेकिन आखिर क्यों अमिताभ बच्चन उनसे बचे रहे और बॉलीवुड में कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते चले गए।

विनोद खन्ना बन गए थे स्वामी विनोद भारती
पेशावर में जन्मे विनोद खन्ना ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है। विनोद खुद को बहुत जिज्ञासु मानते रहे हैं। शायद इसी जिज्ञासा ने उन्हें 70 के दशक में मशहूर हो रहे आचार्य रजनीश यानी ओशो की तरफ आकर्षित किया। समाजवाद, धार्मिक आडंबर, महात्मा गांधी की आलोचना और सेक्स को लेकर खुले विचार रखने वाले ओशो के दर्शन का विनोद के दिल-ओ-दिमाग पर इतना गहरा असर हुआ कि वह 70 के दशक में अपने करियर की बुलंदी पर ओशो के आश्रम में आना जाना शुरू किया। बकौल विनोद उन्होंने खुद अपने बॉलीवुड करियर की बुलंदी पर ओशो के साथ अमेरिका के ओरेगन जाने का फैसला किया। विनोद खन्ना अमेरिका में बने ओशो के आश्रम रजनीशपुरम में रहने चले गए। वहां पर ओशो ने उन्हें स्वामी विनोद भारती नाम दिया। इस बात को खुद विनोद खन्ना ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया है। विनोद खन्ना स्वामी विनोद भारती नाम को अपना संन्यास नाम बताते हैं।

मुझे लोग सेक्सी संन्यासी कहते थे: विनोद खन्ना
एक अंग्रेजी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में खुद विनोद खन्ना ने स्वीकार किया था, ‘बॉलीवुड में नाम, पैसा, ग्लैमर कमाने के बाद मुझे लगा कि अब आगे क्या? इसी उधेड़बुन और जिज्ञासा में मैंने ओशो के पुणे आश्रम जाना शुरू किया। शुरुआत में मैं हफ्ते के आखिरी दिनों में वहां जाता था। यहां तक कि मैं अपने शूटिंग शेड्यूल भी पुणे में रख देता था। ओशो के यहां औपचारिक तौर पर 31 दिसंबर, 1975 को मुझे दीक्षा दी गई। जब मैंने फिल्मों से अपने संन्यास का ऐलान किया तो किसी ने मेरा विश्वास नहीं किया। मुझे सेक्सी-संन्यासी कहा जाने लगा। लेकिन मैंने इसका बुरा नहीं माना।’

ओशो के अमेरिकी आश्रम में माली थे विनोद खन्ना
बॉलीवुड स्टार और राजनेता विनोद खन्ना ओशो के साथ उनके अमेरिका स्थित आश्रम रजनीशपुरम चले गए। बकौल विनोद, मैं उन चंद भारतीयों में से एक हूं जो ओशो के साथ रजनीशपुरम में ठहरे थे। ओशो की पहचान एक सेक्स गुरु की थी। लेकिन ओशो ने हमें सेक्स से परे जाकर उसके जरिए अपने घावों पर मरहम लगाना सिखाया। मैंने ओशो के साथ चार साल बिताए। अमेरिकी आश्रम में मैं माली का काम करता था। यहां तक कि मैंने आश्रम में टॉयलेट से लेकर थाली तक धोया। ओशो के कपड़े भी मेरे ऊपर आजमाए जाते थे क्योंकि हम दोनों एक ही कद काठी के थे।

विनोद खन्ना से अलग हो गई थीं उनकी पत्नी गीतांजलि
जिस दौर में विनोद खन्ना अमेरिका में ओशो के आश्रम में रह रहे थे उस दौर में उनका अपनी पत्नी गीतांजलि के साथ रिश्ता बहुत अच्छा नहीं था। बकौल विनोद, रजनीशपुरम में रहने के दौरान मैं अपने परिवार से फोन पर बात करता था। लोग मेरे दोनों बेटों से कहते थे, तुम्हारा बाप अपने गुरु के साथ भाग गया। धीरे-धीरे चीजें हाथ से बाहर हो गईं और अंत में गीतांजलि ने मुझसे रिश्ता तोड़ लिया। हमने तलाक ले लिया।

भारत लौटे तो बर्बाद हो चुके थे विनोद खन्ना
बॉलीवुड स्टार विनोद खन्ना ने ओशो का साथ छोड़ने और बॉलीवुड में वापसी करने के बारे में एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैंने अपने गुरु के साथ अपनी यात्रा पूरी कर ली थी और उसके बाद उनके साथ रहने का कोई मतलब नहीं रह गया था। इसलिए मैं भारत लौट आया। लेकिन गुरु का साथ छोड़ना बहुत ही मुश्किल फैसला था। उन्होंने मुझसे पुणे का आश्रम चलाने को कहा। लेकिन मैंने नहीं कहा। शायद वह मेरे जीवन का सबसे मुश्किल नहीं रहा होगा। जब मैं अपने देश लौटा तो मेरे पास कुछ भी नहीं था। मैं तंगहाली के दौर से गुजर रहा था। इस वजह से मैं बॉलीवुड में वापस गया। वहां मेरा काम, परिवार और दोस्त थे। बॉलीवुड ने मेरा खुली बाहों के साथ स्वागत किया।’

Vinod-Khanna-dead-Amitabh-Bachchan

विनोद खन्ना से नाम, दाम और काम ज्यादा होने के बावजूद ओशो से दूर रहे अमिताभ
जिस दौर में ओशो की ख्याति अपने शिखर पर थी, उस दौर में अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना को पीछे छोड़कर बॉलीवुड के सुपर स्टार बन चुके थे। विनोद खन्ना की तुलना में उनके पास उस दौर में नाम, काम और दाम कहीं ज्यादा था। लेकिन बावजूद इसके वे बॉलीवुड में ही रमे रहे और अपना काम करते रहे। ओशो की आजाद खयाली और अपारंपरिक सोच अमिताभ पर असर नहीं डाल सकी। गौरतलब है कि 1975 में अमिताभ बच्चन की दो सबसे बड़ी फिल्में-‘शोले’ और ‘दीवार’ रिलीज हुई उसी साल दिसंबर में विनोद खन्ना ने ओशो के यहां दीक्षा ले ली थी। कई जानकार यह मानते हैं कि उस दौर में अगर कोई कलाकार अमिताभ बच्चन को टक्कर दे सकता था, तो वह सिर्फ विनोद खन्ना ही थे। लेकिन विनोद के अमेरिका चले जाने की वजह से अमिताभ का रास्ता साफ हो गया और वे सुपरस्टार बन गए।

हरिवंश राय बच्चन को हो गया था ओशो से मोहभंग!
बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन ओशो से तब से परिचित थे, जब ओशो अपने शुरुआती दौर में ही थे और तब वे अध्यापक हुआ करते थे। दोनों दिल्ली में एक मित्र के यहां पहली बार मिले थे। उस दिन हरिवंश राय ने ओशो को अपनी कविताएं भी सुनाई थीं जो ओशो को बहुत पसंद आई थीं। इस मुलाकात के चलते दोनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी। यह बात खुद हरिवंश राय बच्चन ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया है। इसी किताब में हरिवंश राय ने लिखा कि दिल्ली में मुलाकात के कई साल बाद जब अमिताभ बच्चन सुपरस्टार बन गए और ओशो ने पुणे में आश्रम खोला तो एक दिन वे अपनी पत्नी तेजी बच्चन के साथ पुणे गए। वहां उन्हें जो निर्देश दिए गए और एक मुलाकाती के तौर पर उनके साथ हुआ बर्ताव बच्चन दंपति को नागवार गुजरा। बकौल हरिवंश, ‘जब मैं आश्रम के अंदर गया तो मैंने ओशो की सचिव से कहा कि मैं उनसे मिलना चाहता हूं। इसके जवाब में ओशो की सचिव ने कहा कि अभी आप इंतजार कीजिए, भगवान आराम कर रहे हैं। भगवान शब्द सुनकर मुझे अटपटा लगा। थोड़ी देर बाद मुझे ओशो के पास ले जाया गया। मैं ओशो को और वे मुझे काफी देर तक देखते रहे। लेकिन उन्होंने मुझे पहचाना नहीं। उस दिन के बाद मैं कभी भी ओशो से नहीं मिला।’ हरिवंश राय की आत्मकथा से साफ है कि ओशो का एक इंसान की जगह भगवान बनना उन्हें पसंद नहीं आया। माना जाता है कि हरिवंश राय बच्चन के इसी मोहभंग ने अमिताभ बच्चन को भी ओशो से दूर कर दिया और इस तरह अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में हर गुजरते दिन के साथ बड़े सितारे बनते चले गए।

dabangg-759

Advertisements