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जब चमकता फिल्मी करियर छोड़कर संन्यासी बन गए थे विनोद खन्ना…
अपने ज़माने के सुपरस्टार विनोद खन्ना का आज निधन हो गया. उनका इलाज मुंबई के एक हॉस्पिटल में चल रहा था. हाल ही में उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें वो काफी कमजोर लग रहे थे उन्हें इस हालात में देख कर पहचान पाना बेहद मुश्किल था.
विनोद खन्ना अपने समय में काफी डैशिंग और चार्मिंग हुआ करते थे. एक ऐसा भी समय था जब विनोद खन्ना का फिल्म में होना फिल्म का सफल होना माना जाता था.
उनके बेहतरीन डायलॉग्स पर लोग बिना सीटियां बजाए नहीं रह पाते थे. लेकिन क्या आपको पता है जब वो अपने फ़िल्मी करियर के चरम पर थे तब उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया. जी हां, विनोद खन्ना फ़िल्में छोड़ कर आचार्य रजनीश (ओशो) के शरण में चले गये थे.
ये बात तब की है जब उनका नाम बेहद सफल अभिनेताओं में गिना जाता था. लेकिन उस बीच उनकी मां का निधन हो गया जिससे वो काफी दुखी रहने लगे. इस दौरान विनोद खन्ना की मुलाकात ओशो से हुई.
ओशो से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर से संन्यास ले लिया और अपनी बीवी को तलाक दे दिया. जिसके बाद वो अमेरिका जाकर ओशो के आश्रम में बस गये. ओशो ने उन्हें स्वामी विनोद भारती नाम दिया था.
पांच साल बाद एक बार फिर उन्होंने रुपहले पर्दे पर शानदार एंट्री की. उन्होंने फिल्म ‘इंसाफ’ से अपनी नयी पारी की शुरुआत की. 1987 में आई इस फिल्म में उनकी एक्ट्रेस डिंपल कपाड़िया थी. फिल्म में एक्ट्रेस डिंपल के साथ उनकी केमेस्ट्री को काफी पसंद किया गया.

विनोद खन्ना के बारे में ऐसी 10 बातें… जो शायद आपको न पता हो
खास बातें
विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था.
आजादी के समय हुए बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से मुंबई आकर बस गया
विनोद खन्ना बचपन में बेहद शर्मीले थे और जब वह स्कूल में पढ़ते थे.
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना अब हमारे बीच नहीं रहे. वह 70 साल के थे और कैंसर से पीड़ित थे. गुरुवार को उनका निधन हो गया. विनोद खन्ना अपने जमाने के मशहूर अभिनेताओं में से एक थे. विनोद खन्ना आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी यादें सदैव हमारे दिलों में रहेंगी. बता दें, उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत साल 1968 मे आई फिल्म ‘मन का मीत’ से की, जिसमें उन्होंने एक खलनायक की भूमिका निभाई थी और बाद में एक दिग्गज अभिनेता के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई.
आइए, जानते हैं विनोद खन्ना से जुड़ी 10 अनसुनी बातें…
1. विनोद खन्ना के पिता का टेक्सटाइल, डाई और केमिकल का बिजनेस था.
2. बता दें, विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था. आजादी के समय हुए बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से मुंबई आकर बस गया.
3. विनोद खन्ना के एक भाई और तीन बहनें हैं.
4. विनोद खन्ना बचपन में बेहद शर्मीले थे और जब वह स्कूल में पढ़ते थे, तो उन्हें एक टीचर ने जबरदस्ती नाटक में उतार दिया और तभी से उन्हें अभिनय करना अच्छा लगना लगा.
5. स्कूल में पढ़ाई के दौरान विनोद खन्ना ने ‘सोहलवां साल’ और ‘मुग़ल-ए-आजम’ जैसी फिल्में देखीं और इन फिल्मों ने उन पर गहरा असर छोड़ा.
6. विनोद खन्ना के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मों में जाए, लेकिन अंत में विनोद की ज़िद के आगे उनके पिता झुक गए और उन्होंने विनोद को दो साल का समय दिया. विनोद ने इन दो सालों में मेहनत कर फिल्म इंडस्ट्री में जगह बना ली.
7. बाते दें, सुपरस्टार राजेश खन्ना, विनोद खन्ना के बेहद पसंदीदा अभिनेताओं में एक थे.
8. विनोद खन्ना को सुनील दत्त ने साल 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ में विलेन के रूप में लॉन्च किया. दरअसल यह फिल्म सुनील दत्त ने अपने भाई को बतौर हीरो लॉन्च करने के लिए बनाई थी. वह तो पीछे रह गए, लेकिन विनोद ने फिल्म से अपनी अच्छी पहचान बना ली.
9. हीरो के रूप में स्थापित होने के पहले विनोद ने ‘आन मिलो सजना’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘सच्चा झूठा’ जैसी फिल्मों में सहायक या खलनायक के रूप में काम किया. गुलजार द्वारा निर्देशित ‘मेरे अपने’ (1971) से विनोद खन्ना को चर्चा मिली और बतौर नायक वे नजर आने लगे.
10. मल्टीस्टारर फिल्मों से विनोद को कभी परहेज नहीं रहा और उन्होंने उस दौर के सितारे अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, सुनील दत्त आदि के साथ कई फिल्में साथ में की.

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