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अथर्व फाउंडेशन का ‘वन फॉर ऑल, ऑल फॉर वन’ एक साहसिक प्रयास, लांच
अथर्व फाउंडेशन के चेयरमैन सुनील राणे ने इस सराहनीय, साहसिक और अनूठी पहल की संकल्पना तैयार की है, जिसके समर्थन में उतरीं हैं फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी और निर्देशक मधुर भंडारकर
मुंबई के अथर्व फाउंडेशन ने भारतीय सैनिकों को सम्मानित करने के लिए ‘वन फॉर ऑल, ऑल फॉर वन’ की घोषणा की है। एनजीओ अथर्व फाउंडेशन के इस सराहनीय और साहसिक प्रयास की संकल्पना फाउंडेशन के चेयरमैन सुनील राणे ने तैयार की है। इस अखिल भारतीय अभियान को शुरू में ही अभिनेत्री हेमा मालिनी और निर्देशक मधुर भंडारकर का खुला समर्थन मिला है। मुंबई में हुए एक पत्रकार सम्मलेन में हेमा मालिनी और मधुर भंडारकर की उपस्थिति में सुनील राने ने घोषणा की कि इस पहल का पहला कार्यक्रम मुंबई में 31 जनवरी 2018 को आयोजित किया जाएगा जिसमें देशभर से कम से कम 25000 लोग भाग लेंगे।
गैर सरकारी संगठन अथर्व फाउंडेशन का वन फॉर ऑल, ऑल फॉर वन कार्यक्रम अपनी तरह का पहला और अकेला आयोजन है। जो भारतीय सेना के सैनिकों को सार्वजनिक सलामी देगा और सम्मान प्रदान करेगा। देश में गरीब लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अथर्व फाउंडेशन वर्षों से काम कर रहा है। फाउंडेशन के चेयरमैन सुनील राणे का मानना है कि राष्ट्र का विकास उसके समाज के विभिन्न तबकों के विकास पर निर्भर करता है। इस महान विचार ने ही हमें इस दिशा में अपना योगदान करने के लिए प्रेरित किया है और देश के बहादुर वीर जवानों को सम्मानित करने की दिशा में अथर्व फाउंडेशन ने अपना कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, “कलाकारों और सेलिब्रिटी की सहायता से हम भारतीय सैनिकों की 10 अनकही कहानियों का पाठ भी करेंगे। जहां सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों और उनके गांवों को भी दिखाया जाएगा।” सुनील राणे ने कहा, “छात्रों और युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए हम फिल्म भी बनायेंगे और लघु फिल्म समारोहों का आयोजन भी करेंगे। हम आभारी है पोर्ट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के जिन्होंने हमारी योजना से प्रभावित होकर हमें गेटवे ऑफ इंडिया पर कार्यक्रम करने का प्रस्ताव दिया। जहाँ पर देशभक्ति पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।”
अभिनेत्री सांसद हेमा मालिनी ने सुनील राणे की इस साहसी पहल की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा कि वह उनके साथ भारतीय सीमा पर तैनात सैन्य स्थलों की यात्रा करना चाहेंगी। सांसद अभिनेत्री ने कहा, “आज हम अपने-अपने घरों में खुश और सुरक्षित इसलिए हैं क्योंकि देश की सीमा पर हमारे जवान दिन-रात पहरा देते हैं। हमें उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए, उन्हें और उनके परिवारों को प्रसन्न रखना चाहिए।”
यथार्थवादी सिनेमा बनाने के लिए मशहूर फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर ने भी सैनिकों को सम्मानित करने के श्री राणे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सैनिकों के जीवन पर एक फिल्म बनाने की इच्छा व्यक्त की। फिल्म निर्देशक ने आगे कहा, “जब श्री सुनील राणे ने मुझे इस पहल से अवगत कराया, तो मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने उनसे हमारे सैनिकों की जो सच्ची कहानियां सुनीं, वे बहुत ही दिल दहला देने वाली थीं। मैं हमेशा हमारे देश के लिए काम करूंगा और अगर मैं उनमें से किसी कहानी पर फिल्म बना सका तो मुझे बहुत अधिक खुशी होगी।”
कौन हैं सुनील राणे?
शिक्षा, खेल और एयरलाइंस इंडस्ट्री में उच्च प्रोफाइल करियर पर कार्यरत एक युवा व्यावसायी ने बहुत पहले समाज में बदलाव का बीड़ा उठाया था। सिर्फ सपने देखने के बजाय, उन्होंने अपने सपने को वास्तविकता में परिवर्तित करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। वह एक प्रख्यात शिक्षाविद्, महान दार्शनिक, सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और कुशल राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने महज शब्दों के बजाय अपने कार्यों द्वारा अपने आपको साबित किया है।

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