देश, धर्म और संविधान को बचाने के लिए सब हों एकजुट -शरद यादव
गणतंत्र दिवस पर मुंबई में विपक्ष की सियासी दस्तक
देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने आज, 26 जनवरी को मुंबई में ‘संविधान बचाओ’ रैली निकाली तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने इस रैली के जवाब में तिरंगा रैली का आयोजन किया। केंद्र सरकार कई नीतियों के खिलाफ और संविधान बचाने के लिए मुंबई में एनसीपी के नेता शरद पवार की अगुआई में विपक्षी एकजुटता कि झलक दिखाई दी. संविधान की रक्षा के लिए इन सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने आम्बेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद विधानसभा भवन मंत्रालय सचिवालय से गेट वे ऑफ़ इंडिया तक जुलूस निकाला और धरना, प्रदर्शन किया।
‘संविधान बचाओ रैली में दिखी विपक्ष की ताकत
‘संविधान बचाओ रैली का आयोजन शरद पवार के ख़ास राजू शेट्टी व उनकी स्वाभिमानी शेतकारी संघटना ने किया. जिसमें उनका साथ जिसमें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण, सुशील कुमार शिंदे, पृथ्वीराज चव्हाण, युवा नेता हार्दिक पटेल, आमदार जिग्नेश मेवानी, कन्हैया कुमार, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, नॅशनल फ्रंट के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला, वामपंथी दल सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने दिया और शिवसेना नेता संजय राउत ने इस रैली के लिए दूर से अपनी शुभकामनाएं दीं.
विपक्ष को एकजुट करने की शरद पवार की पहल
बता दें, संविधान बचाने के लिए इस रैली का सुझाव मुंबई आईआईटी के कुछ युवाओं ने दिया था, जिसकी अगुवाई शरद पवार ने की। उन युवाओं की सलाह पर इसे संविधान बचाओ रैली का नाम दिया गया और इसमें गुजरात के तीन युवा नेताओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकौर को बुलाने का फैसला किया गया। कांग्रेस पार्टी के तमाम प्रदेश नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। पिछले कुछ समय से दिल्ली में विपक्षी पार्टियों की बैठक और सम्मेलन होते रहे हैं। हालांकि इसमें किसी सम्मेलन में शरद पवार हिस्सा नहीं लेते थे। उनकी पार्टी का प्रतिनिधित्व प्रफुल्ल पटेल या डीपी त्रिपाठी करते थे। लेकिन इस बार पवार ने खुद संविधान बचाओ रैली की अगुवाई की। इसलिए उन्होंने देश भर के वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को बुलाया।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव, जनता दल यू के बागी नेता शरद यादव, सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी को इस रैली में बुलाया गया।
देश, धर्म और संविधान को बचाने के लिए सब हों एकजुट
शरद यादव ने इस मौके पर कहा, “पिछले साढे तीन साल से बीजेपी नेताओं के बयानों को देखिये तो सिर्फ यही नज़र आता है कि वे देश को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं. और अब तो हालात यह है कि संविधान तक को बदलने की खुले आम धमकियां दी जा रही हैं.”
बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के नेता तेजस्वी यादव को भी रैली में आमंत्रित किया गया। तय कार्यक्रम के मुताबिक विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार के सचिवालय मंत्रालय से लेकर गेटवे ऑफ इंडिया तक मार्च किया। रैली का आयोजन करने वाले नेताओं के मुताबिक केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े की ओर से संविधान बदलने का बयान देने और सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के लोकतंत्र पर खतरा बताने वाले बयान के बाद विपक्ष ने इस रैली की योजना बनाई और इसके लिए गणतंत्र दिवस का चुनाव किया गया।
2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी का बिगुल
मुंबई में विपक्षी दलों द्वारा संविधान बचाओ रैली की तैयारी में जुटे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं। 2019 लोकसभा के बारे में उन्होंने कहा कि एनसीपी केवल कांग्रेस के साथ ही चुनाव लड़ेगी, जबकि शिवसेना को अकेले ही लड़ना होगा। संविधान बचाओ रैली के बारे में शरद ने कहा, ‘सरकार के एक मंत्री ने एक बार पब्लिक प्लेटफॉर्म से कहा कि उनकी पार्टी संविधान को बदलने के लिए आई है। हालांकि उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया, लेकिन इससे बीजेपी की नीयत सामने आ गई। देश को इससे बचाने के लिए ही इस रैली की जरुरत पड़ी।’

‘संविधान बचाओ’ रैली के जवाब में भाजपा की ‘तिरंगा यात्रा’
उधर विपक्ष के इस ‘संविधान बचाओ’ रैली के जवाब में सत्तापक्ष भाजपा ने बाबा साहेब की चैत्य भूमि से
‘तिरंगा यात्रा’ निकाली जिसे परेल के कामगार मैदान में समापन पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने संबोधित किया.

पाठकों से अपील: इस न्यूज़ आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपके दिमाग में देश को लेकर कई बातें चल रही होंगी. आपके सामने है एक बढ़ि‍या मौका. चुप मत बैठिए, मोबाइल उठाइए और देश के नाम लिख डालिए एक लेटर. आप अपनी आवाज / विडियो भी रिकॉर्ड कर सकते हैं. आप अपना लेटर  ipspromax@gmail.com पर भेजें. आपकी बात देश तक जरूर पहुंचेगी.

Advertisements