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कौन है कासगंज की हिंसा का षड़यंत्रकारी, मोदी-योगी की चुप्पी देश पर भारी
हमारा भारत देश अनेकता में एकता समेटे हुए एक ऐसा राष्ट्र है जहाँ कुछ सांप्रदायिक लोगों की गिद्ध दृष्टि इस बात पर हमेशा लगी रहती है कि कैसे इन शांति प्रिय लोगों की शांति भंग की जाये, कैसे इनका अमन-चैन छीना जाए? लेकिन बकौल अल्लामा इकबाल “कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी”. लगातार चौथे दिन अशांत रहे कासगंज पर अब सरकारी मशीनरी भी मान रही है कि शहर राजनीतिक षड़यंत्र का शिकार हुआ है, लेकिन तथ्य बता रहे हैं कि कासगंज वास्तव में भाजपा और आरएसएस के भगवाधारी गिरोह के राजनीतिक षड़यंत्र का शिकार हुआ है.
कासंगज: सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहे उत्तर प्रदेश के कासंगज में लगातार तीसरे दिन बवाल जारी है. रविवार की सुबह उपद्रवी तत्वों ने एक दुकान में आग लगा दी. गणतंत्र दिवस के मौके पर पश्चिमी यूपी के कासगंज में भड़की हिंसा में 22 वर्षीय चंदन गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई। एबीवीपी और विहिप की बाइक रैली के दौरान यह घटना हुई। इसको लेकर कासगंज में दो समुदायों के बीच तीसरे दिन भी तनाव बना हुआ है। युवक के अंतिम संस्कार के दौरान भी हिंसा भड़क उठी और अराजक तत्वों ने एक पक्ष की दुकानें जला दीं।  रोती-बिलखती चंदन की मां संगीता ने कहा है कि उनका बेटा चंदन किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा था। उसने पाकिस्‍तान जिंदाबाद का नारा नहीं लगाया तो उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। संगीता ने कहा, ‘मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती हूं। मेरा बेटा तो भारत माता की जय बोल रहा था। अगर मेरे बेटे ने कोई गुनाह किया तो मुझे भी गोली मार दी जाए।
पिता ने बेटे के लिए मांगा शहीद का दर्जा
वहीं प्राइवेट हास्पिटल में काम करने वाले चंदन के पिता सुशील गुप्ता ने बेटे के लिए शहीद का दर्जा मांगा है। सुशील ने कहा- ‘‘ मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे को न्याय मिले। उसे आसामाजिक तत्वों ने गोली मार दी। अखलाक के मरने पर नौकरी और फ्लैट दे रहे हैं क्या हिंदू के लिए कुछ नहीं है। ” सुशील ने कहा कि उनका बेटा भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलने के कारण जान से मार दिया गया।
डीजीपी ने घटना को सांप्रदायिक माना
घटना के बाद पुलिस प्रशासन कासगंज में कानून-व्यवस्था की बहाली की कवायद में जुटा है। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा है कि 60 से 65 लोगों को गिरफ्तार किया है। इंटरनेट को बाधित कर अफवाह फैलने से रोका गया है । एबीपी न्यूज से बातचीत में डीजीपी ने घटना को सांप्रदायिक घटना माना। डीजीपी ने कहा कि कानून-व्यवस्था की बहाली के लिए पुलिस सख्त से सख्त कदम उठाएगी। हाउस टू हाउस सर्च कर रहे हैं। नेताओं के जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर उपद्रवियों पर रासुका के तहत कार्रवाई होगी।
दोस्त ने तो फेसबुक पर लिखा था कासगंज की आबोहवा अच्छी है
अभी 2-3 दिन पहले ही मेरे कासगंज निवासी दोस्त राजपाल सिंह से उनका हाल-चाल पूछने के बाद मैंने फेसबुक पर यूँ ही पूछ लिया था कि कासगंज की आबोहवा कैसी है, तो उन्होंने लिखा था कि कासगंज की आबोहवा अच्छी है… लेकिन पता नहीं, मेरे पड़ोसी शहर कासगंज को किसकी नज़र लग गई? कभी सोचता हूँ कहीं मेरी ही तो नहीं लग गई?? लेकिन मुझे क्या पता था, कि अगले ही दिन तिरंगे को लेकर वहां दंगा भड़क जायेगा जिसमें एक मासूम की जान चली जायेगी. मोदीराज-योगीराज में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ, ऐसा दावा करने वालों की हवा निकल गई और यह हवा एक बार नहीं पिछले सालों में कई बार निकली है.
अंध भक्त लोग’ आपको मारने दौड़ पड़ेंगे
अब इस संयोग को क्या कहें, यह सोचने वाली बात है. लेकिन समस्या यह है कि आप कुछ भी कहोगे, बोलोगे, सुनोगे, या चर्चा में भाग लोगे तो ये मूर्ख ‘अंध भक्त लोग’ आपको मारने, काटने दौड़ पड़ेंगे और आपको देशद्रोही करार दे देंगे, मानो देशभक्ति का सबसे बड़ा ठेका इन्होंने ही ले रखा है. अब मौत के डर से आप जीना तो नहीं छोड़ देते. सबको पता है मौत तो सबको एक न एक दिन आनी ही है, तो जब तक जिंदगी है, क्यों न भरपूर जी लिया जाए? जब तक है जान, तब तक है शान, सच की है शान.
चारों तरफ से हमें चीन घेर रहा, पर सरकार को तीन तलाक से ही फुर्सत नहीं
बहरहाल, सांप्रदायिक दंगों से कमजोर भारत को चीन चारों तरफ से घेर रहा है लेकिन इन सरकार को नए बैंक खाते खोलने, मोबाइल-आधार लिंक करने, स्वच्छ भारत, नए शौचालय बनवाने, पुराने तुड़वाने, जाति, धर्म, साम्प्रदाय की नफ़रत फैलाने, गाय, भेंस, बकरे, नमाज़, लाउड स्पीकर, बुरखा बैन, तीन तलाक से ही फुर्सत नहीं मिल पा रही है.
भगवा गिरोह के कारनामे, आम आदमी अपनी जान गंवावे
ये एबीवीपी और विहिप के कौन लोग हैं? ये सब भाजपा और आरएसएस के लोग और संगठन हैं. आरएसएस का भगवा गिरोह भारत को हिन्दूराष्ट्र बनाने की दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम कर रहा है, इसीलिए देश को सांप्रदायिक दंगों की भट्टी में झोंकने का सुनियोजित कार्य चल रहा है. जो खाई इन्होंने दूसरों के लिए खोदी है उसमें इनके खुद के लोग दफ़न हो रहे हैं. जिसके नतीजे में कहीं सांप्रदायिक दंगों की भट्टी झोंकने का काम चल रहा तो कहीं बेचारी निर्दोष गाय के नाम पर पीट पीट कर हत्याएं की जा रही हैं तो कहीं जहरीली बयान-बाज़ियाँ हो रही हैं. मजेदार तथ्य यह है कि इन सब मुद्दों पर पीएम नरेंद्र मोदी की मनमोहनी चुप्पी उनका रुख स्वतः बयां कर देती है.
वारदातों के पीछे राजनीतिक साजिश 
लेकिन दोस्तो, क्या यह सच नहीं है कि आज देश में लोगों के बीच नफ़रत, असंतोष, असहिष्णुता अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच चुकी है. रातोंरात देश, धर्म और संविधान बदलने और हर चीज़ का भगवाकरण की राजनीति करने वाले कभी समाज में शांति, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द नहीं दे सकते, वो देश को सिर्फ सांप्रदायिक भट्टी में जरूर झोंक सकते हैं. 2019 के महा चुनाव का बिगुल बज चुका है, इसलिए, आने वाला समय और भयावह होने वाला है, इसलिए इन बांटने वाली ताकतों से हमें हर वक्त सावधान रहने की जरूरत है. कासगंज हिंसा पर एसपी सुनील कुमार सिंह ने हिंसा की वारदातों के पीछे राजनीतिक साजिश की
आशंका से इंकार नहीं किया है.
तिरंगा यात्रा निकाल रहे लोगों ने की थी भड़काऊ नारेबाजी
एसपी सुनील कुमार सिंह ने साथ ही गणतंत्र दिवस पर तिरंगा यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाले तत्वों के बारे में भी अहम खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा निकाल रहे लोगों ने एक खास जगह पहुंचकर कुछ भड़काऊ नारेबाजी की, जिसके चलते झगड़ा शुरू हुआ और हिंसा भड़क उठी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन हिंसा त्वरित कारणों से भड़की, लेकिन उसके बाद फैलाई जा रही हिंसा के पीछे कोई राजनीतिक साजिश है.
योगीराज में कोई सुरक्षित नहीं’ अखिलेश
कासगंज में बीते तीन दिनों से हिंसा जारी है, ऐसे में सीएम योगी की चुप्पी पर विपक्ष हमलावर हो रहा है। योगी सरकार ने कानून को कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है, लेकिन खुद इस मामलें में चुप हैं, जिसकी वजह से अखिलेश यादव उनपर जमकर बरसते नजर आए। कासगंज में फैली हिंसा के बीच यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बीजेपी की सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए अपील भी की है। अखिलेश ने योगी से अपील की है कि वो जल्द से जल्द मामलें को शांत कराके प्रदेश में अमन चैन बनाएं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था पहले से भी खराब होती जा रही है, प्रदेश को हिंदू मुस्लिम में बांटा जा रहा है, जो किसी भी नजरिये से उचित नहीं है। इसके अलावा अखिलेश ने योगी की चुप्पी पर कहा कि मुख्यमंत्री मामलें में अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं, जोकि ठीक नहीं है।

कौन है कासगंज की हिंसा का षड़यंत्रकारी, मोदी-योगी की चुप्पी देश पर भारी
आईपीएस यादव

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